रविवार, दिसंबर 13, 2009

आईटी प्लेग

ये व्यंग १९९५-९८ के दरमियाँ लेखे गए थे, उसके बाद मुझे कंप्यूटर के चूहे ने काट लिया था और मुझे आईटी प्लेग हो गया । आज में उस प्लेग से उबरने की कोशिश कर रहा हूँ , शुरुआत की है अपने पुराने अख़बारों में प्रकाशित लेखों को यहाँ प्रस्तुत करके ।
आशा करता हूँ कि आप मुझे आईटी प्लेग से उबारने में मेरे सहायक बनेंगे, ताकि मैं हिन्दी देवी के मन्दिर में फ़िर प्रवेश कर सकूं ।
***इन लेखों को पढ़ने हेतु, कृपया image पर click करें. इससे ये image नए पेज पर खुल जायेगा और इसके अक्षर बड़े देखेंगे.
धन्यवाद्,
नीतेश

6 टिप्‍पणियां:

चंदन कुमार झा ने कहा…

बहुत बहुत स्वागत है.

आपके लेखो का इंतजार है ।

अजय कुमार ने कहा…

हिंदी ब्लाग लेखन के लिए स्वागत और बधाई
कृपया अन्य ब्लॉगों को भी पढें और अपनी टिप्पणियां दें

कृपया वर्ड-वेरिफिकेशन हटा लीजिये
वर्ड वेरीफिकेशन हटाने के लिए:
डैशबोर्ड>सेटिंग्स>कमेन्टस>Show word verification for comments?>
इसमें ’नो’ का विकल्प चुन लें..बस हो गया..कितना सरल है न हटाना
और उतना ही मुश्किल-इसे भरना!! यकीन मानिये

मनोज कुमार ने कहा…

बधाई। ब्लॉगजगत में स्वागत।

kshama ने कहा…

Are ye plague to mujhe bhee ho gaya hai...!

shama ने कहा…

Mujhe to blog plague ho gaya hai!

dweepanter ने कहा…

ब्लाग जगत में द्वीपांतर परिवार आपका स्वागत करता है।

pls visit...
http://dweepanter.blogspot.com

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मेरी फ़ोटो
If you find moody among moodiest, you'll find me standing in the front file & on the sea shore of time on the sliding sand of my mind from the ripples of life. And that ripples is toast with the perfect blend of doing things in different ways. It is not like that I am different from any other, but I have something that differentiate me from the rest of surroundings, additionally integrate me with the characters roaming in my visinity. With that I am fond of moving off the track enjoying the twist in life. I hate stupidity, fake superiority complex, dishonesty, falsehood of any kind and indiscipline. Transparency in my life help me in deviating my energy to convert it into strength rather than keeping life black to look opaque. Being religious help me in getting out of stress and get my biological RAM flash out. Speed is my in-out. You find me fast express speaking man. It is hard to understand me sometimes when I was on peak of my expresso flow of words.