मुझे माफ़ करना मुंबई
दया प्रेम आवेग तू अंखियाँ गीली मात होने दे,
कसकर पकड़ कृपण तू मुठियाँ ढीली मत होने दे।
जहाँ सस्त्र बल नहीं शास्त्र रोते और पछताते हैं,
ऋषियों को भी मिली सफलता तब से तब ही,
प्रहरे पर जब स्वयं धनुर्धर राम खड़े होते हैं।
[मुझे माफ़ करना मुंबई एक मूकदर्शक बने रहने को]
कसकर पकड़ कृपण तू मुठियाँ ढीली मत होने दे।
जहाँ सस्त्र बल नहीं शास्त्र रोते और पछताते हैं,
ऋषियों को भी मिली सफलता तब से तब ही,
प्रहरे पर जब स्वयं धनुर्धर राम खड़े होते हैं।
[मुझे माफ़ करना मुंबई एक मूकदर्शक बने रहने को]
मेरे पिताजी की कविताओ में से कुछ चार लाइन...
मेरे पिताजी की कविताओ में से कुछ चार लाइन...
जीवन तो एक मकड़जाल है,
आर-पार उलझन ही उलझन.
अगर कहें अटका-भटका मन,
तो तार-तार बुनता चल हे जन.
जीवन तो एक मकड़जाल है,
आर-पार उलझन ही उलझन.
अगर कहें अटका-भटका मन,
तो तार-तार बुनता चल हे जन.
गरीबों की कहानी
गरीबों की कहानी
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गरीबों की कहानी,
छपकर किताबों में,
बुनकर फिल्मों में,
बिकती है महंगी।
पढ़-देख-सुनकर अमीरों ने जाने है किस्से ;
किस्से भूख, वेबसी, मुफलिसी के।
महसूस करने का स्वांग रचा जाता है वातानुकूलित कमरों में।
अनुभूति जागती फ़िर ।
गरीब पा जाते दया के सिक्के।
सिक्कों के खनक होती किंतु क्षणिक फ़िर नई किताब या फ़िल्म के आने तक।
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गरीबों की कहानी,
छपकर किताबों में,
बुनकर फिल्मों में,
बिकती है महंगी।
पढ़-देख-सुनकर अमीरों ने जाने है किस्से ;
किस्से भूख, वेबसी, मुफलिसी के।
महसूस करने का स्वांग रचा जाता है वातानुकूलित कमरों में।
अनुभूति जागती फ़िर ।
गरीब पा जाते दया के सिक्के।
सिक्कों के खनक होती किंतु क्षणिक फ़िर नई किताब या फ़िल्म के आने तक।
काला बादल
काला बादल
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देखो आसमान में कैसा उमड़ आया है काला काला बादल ।
लाल-काली मिट्टी में सोंधी खुश्बू भरने।
पहली बूंद
पहली बूंद
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पहली बूंद जैसे तपते तवे पर नाचती मयूरी की तरह,
सुरभित वातावरण जिससे।
किसान खुश ,खेत खुश, सूखे नदी-नाले खुश, जलचर खुश, वनचर खुश;
खुश, पहली बूंद का रूपक बन गया जैसे।
एक पानी के छोटे से भी छोटे गोले में कितनी सम्भावनाये...
अद्भुत।
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पहली बूंद जैसे तपते तवे पर नाचती मयूरी की तरह,
सुरभित वातावरण जिससे।
किसान खुश ,खेत खुश, सूखे नदी-नाले खुश, जलचर खुश, वनचर खुश;
खुश, पहली बूंद का रूपक बन गया जैसे।
एक पानी के छोटे से भी छोटे गोले में कितनी सम्भावनाये...
अद्भुत।
टेक्नोक्रेट की अभिलाषा
चाह नहीं मैं बन नेता,
इधर से उधर निठल्ले फिरूं ।
चाह नहीं भ्रष्ट सांसद या विधायक बन ,
मीडिया में छा जाऊं, कोर्ट के द्वारे फिरूं ।
चाह नहीं अभिनेता बन कर अंडरवर्ल्ड को ललचाऊ।
चाह नही पुलिस के हत्थे चढूं
वकीलों से बच भाग्य पर इठलाऊँ।
चाह नही भ्रष्टाचारी के समर्थन में में मैं वोट डालूं।
मुझे बैठा लेना ओ एयरलाइन्स वाले; अमेरिका में देना तुम फैंक
बैंक बैलेंस डॉलर में बढ़ने जहाँ जायें टेक्नोक्रेट अनेक।
[26/06/2001]
इधर से उधर निठल्ले फिरूं ।
चाह नहीं भ्रष्ट सांसद या विधायक बन ,
मीडिया में छा जाऊं, कोर्ट के द्वारे फिरूं ।
चाह नहीं अभिनेता बन कर अंडरवर्ल्ड को ललचाऊ।
चाह नही पुलिस के हत्थे चढूं
वकीलों से बच भाग्य पर इठलाऊँ।
चाह नही भ्रष्टाचारी के समर्थन में में मैं वोट डालूं।
मुझे बैठा लेना ओ एयरलाइन्स वाले; अमेरिका में देना तुम फैंक
बैंक बैलेंस डॉलर में बढ़ने जहाँ जायें टेक्नोक्रेट अनेक।
[26/06/2001]
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बस स्टॉप
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कुछ प्रयास आपके समक्ष प्रस्तुत कर रहा हू. आशा है, इस धागे को पूरा करेगे............. बरसातॅ होती है बाढ पर , सूखी जमीन रोती है रात भर. रात...